प्रकृति के उपहारों को समझें। सही ज्ञान के साथ, आप रक्त शर्करा को नियंत्रित करते हुए भी उष्णकटिबंधीय स्वाद का आनंद ले सकते हैं।
बहुत से लोग मानते हैं कि मीठे फलों का सेवन पूरी तरह वर्जित है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर निर्भर करता है। कम जीआई वाले फल धीरे-धीरे पचते हैं।
उदाहरण के लिए, जामुन और अमरूद जैसे भारतीय उष्णकटिबंधीय फल फाइबर से भरपूर होते हैं। फाइबर चीनी के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ऊर्जा का स्तर स्थिर रहता है।
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फाइबर पाचन में सहायता करता है और चीनी के स्पाइक्स को रोकता है।
विटामिन सी और ए से भरपूर, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।
तरबूज जैसे फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है।
बिना थकान के पूरे दिन ऊर्जावान महसूस करें।
केवल फल चुनना ही काफी नहीं है, बल्कि 'कितना' खाना है, यह भी महत्वपूर्ण है। इसे "पोर्शन कंट्रोल" कहा जाता है।
एक बार में बहुत अधिक फल खाने से कैलोरी और कार्ब्स बढ़ सकते हैं। अपने फलों को नट्स या दही के साथ मिलाकर खाने से उनका प्रभाव और भी संतुलित हो जाता है।
छोटे बदलाव ही बड़े परिणाम लाते हैं।
"मैंने अपनी डाइट में जामुन को शामिल किया और मुझे बहुत हल्का महसूस होता है।"
"फलों के सही चुनाव के बारे में जानकारी ने मेरी जीवनशैली बदल दी।"
"अब मैं बिना डर के पपीता खा सकता हूँ। जानकारी ही बचाव है।"
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केले में चीनी की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए छोटे, हरे केले चुनना और सीमित मात्रा में खाना बेहतर है।
जामुन और अमरूद में फाइबर अधिक और चीनी कम होती है, जो उन्हें उत्कृष्ट विकल्प बनाती है।
नहीं, साबुत फल खाना हमेशा बेहतर होता है क्योंकि रस में फाइबर नहीं होता और चीनी रक्त में तेजी से घुलती है।
सुबह या कसरत के बाद फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है ताकि शरीर उस ऊर्जा का उपयोग कर सके।